भुसावल दि .15 ( प्रतिनिधि ) रेलवे के तीव्र आधुनिकीकरण, ठेका व्यवस्था तथा नई तकनीकी प्रणालियों के विस्तार के कारण देशभर के पारंपरिक कुलियों की आजीविका पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। इस विषय को लेकर राष्ट्रीय कुली मोर्चा की एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक 11 मार्च को आयोजित की गई, जिसमें देशभर के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर कार्यरत कुली प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक की अध्यक्षता मोर्चा के संयोजक राम सुरेश यादव ने की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से यात्रियों की सेवा में लगे कुलियों के सामने आज रोजगार और भविष्य का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। बदलती व्यवस्था के कारण कई कुलियों को अपने परिवार का भरण-पोषण करना भी कठिन हो रहा है।
मोर्चा के संयोजक राम सुरेश यादव ने बताया कि 19 जून 2025 को रेल मंत्रालय द्वारा देशभर के कुलियों की वास्तविक स्थिति का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे, किंतु अब तक उस सर्वे की प्रगति और उसके आधार पर की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

उन्होंने बताया कि 18 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय कुली मोर्चा के प्रतिनिधियों ने देशभर के मंडल रेल प्रबंधकों (DRM) को निवेदन पत्र सौंपकर सर्वे को प्रभावी रूप से कराने और उसकी प्रगति की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से कुलियों में निराशा और चिंता का माहौल है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 16 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे से पूरे देश में अभियान चलाकर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। इस अभियान के माध्यम से कुलियों की आजीविका, पुनर्वास, समायोजन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मांगों को सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
राम सुरेश यादव ने कहा कि देश के कुली किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि सम्मानजनक जीवन, पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। वर्षों से यात्रियों की सेवा करने वाले कुलियों के भविष्य को सुरक्षित करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।
इस वर्चुअल बैठक में अनिल सावले, राहुल कुमार, राजकपूर, अरविंद, संजय यादव, सुरेंद्र यादव, अरुण कुमार, कलीम मकरानी, रमेश ठाकुर, जितेंद्र डांगी, चंद्रेश्वर मुखिया, धर्मवीर, रामबाबू भिलाला, राम महावार, राजू टेकम, राम जनम सहित कई प्रतिनिधि उपस्थित थे।
अनिल सावले
संयोजक, मध्य रेलवे जोन
राष्ट्रीय कुली मोर्चा
























